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शिशà¥à¤“ं को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पिलाने से उनके शरीर की नाजà¥à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ इसे संà¤à¤¾à¤² नहीं पाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ पानी को संसाधित करने के लिठअपरिपकà¥à¤µ होते हैं, जिससे उनके शरीर का इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿ संतà¥à¤²à¤¨ बिगड़ जाता है, जो लो बॉडी टेंपरेचर और सीजर डिसऑरà¥à¤¡à¤°, जैसी गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का कारण बन सकता है।
​शिशà¥à¤“ं में वॉटर इंटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤•ेशन के कारण
शिशॠअपनी मरà¥à¤œà¥€ से पानी का सेवन नहीं करते हैं।
वॉटर इंटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤•ेशन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब होती है, जब बचà¥à¤šà¥‡ को विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीकों से पानी पिलाया जाता है, जिसके कारण वे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पी लेते हैं।
दूध और जूस पिलाना,
बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पतला फॉरà¥à¤®à¥‚ला फूड खिलाना
बोतल से दूध पिलाना।
​शिशà¥à¤“ं में वॉटर इंटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤•ेशन के लकà¥à¤·à¤£
शरीर में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी, हाइपोनेटà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ का कारण बनता है, जिसके कारण बॉडी में सोडियम का लेवल बहà¥à¤¤ ही कम हो जाता है, जो बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के अलावा विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है।
हाइपोनेटà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾
शिशà¥à¤“ं में हाइपोनेटà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल हैं - असामानà¥à¤¯ रूप से साफ पेशाब आना, चकà¥à¤•र आना और सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€, मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€, हाथ, पैर और चेहरे पर सूजन, बॉडी में सोडियम का लेवल बहà¥à¤¤ कम हो जाने पर बेहोश हो जाना, असामानà¥à¤¯ रूप से सांस लेना, शरीर का तापमान 97°F (36°C) से कम होना (हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾) और बचà¥à¤šà¥‡ में चिड़चिड़ाहट होना।
वॉटर इंटॉकà¥à¤¸à¤¿à¤•ेशन के कà¥à¤› मामलों में दौरे पड़ने और कोमा की शिकायत à¤à¥€ हो सकती है। उपरोकà¥à¤¤ में से कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर बाल रोग विशेषजà¥à¤ž से सलाह लें।
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